World Earth Day is being celebrated today

World Earth Day is being celebrated today

• ‘ Earth Day ‘ i.e. ‘ Earth Day ‘ is celebrated on 22th April with the aim of saving all the creatures and plants living on Earth and raising awareness about environment around the world. 51th anniversary of World Earth Day is being celebrated on 22 April 2021

• World Earth Day 2021 is not being celebrated this year as usual because this year also the world is facing an epidemic like Covid-19 like last year. In view of this epidemic, especially in India, people are celebrating Earth Day by staying at their homes.

• Every year there is also a special theme to celebrate this day. 2021 theme is ‘Restore Our Earth’. There in 2020 it was theme Climate Action.

• We need to adopt environment friendly policies in different areas of the world, keeping in mind climate change. UNDP study recorded a rise in greenhouse gases levels by more than 50 % compared to 1990

• UNDP could earn USD 26 trillion benefits by 2030 by taking bold steps towards climate change and climate action. 18 million new job opportunities can be created by 2030 only in the field of energy if focus on renewable energy.

आज मनाया जा रहा है विश्व पृथ्वी दिवस
• पृथ्वी पर रहने वाले तमाम जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों को बचाने तथा दुनिया भर में पर्यावरण के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लक्ष्य के साथ 22 अप्रैल के दिन ‘पृथ्वी दिवस’ यानि ‘अर्थ डे’ मनाया जाता है। 22 अप्रैल 2021 को विश्व पृथ्वी दिवस की 51वीं सालगिरह मनाई जा रही है।
• विश्व पृथ्वी दिवस 2021 को इस साल भी हमेशा की तरह नहीं मनाया जा रहा है क्योंकि इस साल भी विश्व पिछले वर्ष की तरह कोविड-19 जैसी महामारी झेल रहा है। इस महामारी को देखते हुए खासकर भारत में लोग अपने अपने घर पर रह कर ही पृथ्वी दिवस मना रहे है।
• हर साल इस दिवस को मनाने के लिए एक विशेष थीम भी होता है। 2021 का विषय ‘Restore Our Earth’ है। वहीँ 2020 में इसका विषय क्लाइमेट एक्शन था।
• हमें जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए हमें विश्व के लिए विभिन्न क्षेत्रों में पर्यावरण अनुकूल नीतियों को अपनाने की जरूरत है। यूएनडीपी के अध्ययन के अनुसार ग्रीनहाउस गैसों के स्तर में 1990 के मुकाबले 50% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
• यूएनडीपी के अनुसार मौसम परिवर्तन तथा क्लाइमेट एक्शन की दिशा में साहसी कदम उठा कर 2030 तक 26 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर के लाभ अर्जित किए जा सकते हैं। यदि अक्षय ऊर्जा पर ध्यान दें तो सिर्फ ऊर्जा के क्षेत्र में ही 2030 तक 18 मिलियन रोज़गार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
प्रष्ठभूमि
• पृथ्वी दिवस की शुरुआत अमेरिकी सीनेटर गेलोर्ड नेल्सन (Gaylord Nelson) ने पर्यावरण की शिक्षा के रूप में की थी। सबसे पहले इस दिन को मनाने की शुरुआत सन् 1970 में हुई, जिसके बाद आज इस दिन को लगभग 195 से ज्यादा देश मनाते हैं।
• साल 1969 में कैलिफोर्निया के सांता बारबरा में तेल रिसाव के कारण भारी बर्बादी हुई थी, जिससे वह बहुत आहत हुए और पर्यावरण संरक्षण को लेकर कुछ करने का फैसला किया।
• 22 जनवरी को समुद्र में तीन मिलियन गैलेन तेल रिसाव हुआ था, जिससे अनेक जीव-जन्तु मारे गए थे। इसके बाद नेल्सन के आह्वाहन पर 22 अप्रैल 1970 को लगभग दो करोड़ अमेरिकी लोगों ने पृथ्वी दिवस के पहले आयोजन में भाग लिया था।

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Babasaheb Ambedkar, Father of Indian Constitution(14 April, 1891-6 December 1956)

Babasaheb Ambedkar, Father of Indian Constitution(14 April, 1891-6 December 1956)

Dr. Bhimrao Ambedkar:(14 April, 1891-6 December 1956)Indian legislator, economist, politician, and social reformer Babasaheb Ambedkar was born in Mahu, Madhya Pradesh, the central province of British India.Nickname: Babasaheb Ambedkar, Father of Indian Constitution.

• Babasaheb’s name in childhood was Bhimrao Ramji Sakpal but due to the influence and affection of one of his Brahmin teacher Mahadev Ambedkar, he started putting Ambedkar in his name which was based on the name of his village Ambwada.

Ideology:

• There is no compromise between a rebellious attitude towards unfair and inappropriate behavior, intense memory power, intelligence, honesty and truthfulness and indifferent regularity.

Education:

• Ambedkar took admission in the first English class on 7 November 1900 at Satara’s State Secondary School (now Pratap Singh High School). (In honor of the same day, Student Day is celebrated in Maharashtra on 7 November which was announced by the Department of Education, Government of Maharashtra, on 27 October 2017 )

• Bombay University – Bachelor of Arts, (Economics & Political Science, 1912)

• Columbia University: (MA, PH. D, L. L. B)

• From London: Postgraduate of Science (M ॰ SC ॰), in 1922 (Barrister-at-Law), in 1923 (D ॰ Sc ॰).

डॉ॰ भीमराव अम्बेडकर :
(14 अप्रैल, 1891 – 6 दिसंबर 1956)
भारतीय विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ, और समाजसुधारक बाबासाहेब अम्बेडकर का जन्म ब्रिटिश भारत के मध्य प्रांत महू, मध्यप्रदेश में हुआ था।
उपनाम : बाबासाहेब अम्बेडकर,भारतीय संविधान के पिता।
• बाबासाहेब का बचपन में नाम भीमराव रामजी सकपाल था लेकिन अपने एक ब्राह्मण शिक्षक महादेव अम्बेडकर के प्रभाव व स्नेह के चलते अपने नाम में अम्बेडकर लगाना शुरू किया जो उनके गाँव के नाम अम्बवाड़े पर आधारित था।
विचारधारा :
• अनुचित और अहितकर व्यवहार के प्रति विद्रोही रूख, प्रखर स्मरण शक्ति, बुद्धिमत्ता, ईमानदारी एवं सच व अडिग नियमितता के बीच कोई समझौता नहीं।
शिक्षा :
• अम्बेडकर ने सतारा के राजकीय माध्यमिक विद्यालय (अब प्रतापसिंह हाईस्कूल) में 7 नवंबर 1900 को पहली अंग्रेजी कक्षा में प्रवेश लिया। (इसी दिन के सम्मान में 7 नवंबर को महाराष्ट्र में विद्यार्थी दिवस मनाया जाता है जिसकी घोषणा महाराष्ट्र सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा 27 अक्टूबर 2017 में की गई थी।)
• बॉम्बे विश्वविद्यालय – कला स्नातक, (अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान,1912)
• कोलंबिया विश्वविद्यालय : (एमए, पीएच.डी, एल.एल.बी)
• लंदन से : वर्ष 1921 में विज्ञान स्नातकोत्तर (एम॰एससी॰), 1922 में (बैरिस्टर-एट-लॉ), 1923 में (डी॰एससी॰)।
सामाजिक व राजनीतिक दल :
• बहिष्कृत हितकारिणी सभा एवं डिप्रेस्ड क्लासेस एजुकेशन सोसायटी, पीपुल्स एजुकेशन सोसायटी, स्वतंत्र लेबर पार्टी तथा शेड्यूल्ड कास्ट फेडरेशन भारतीय रिपब्लिक पार्टी।
प्रमुख पुस्तक :- एनहाइलेशन ऑफ़ कास्ट।
राजनीतिक उपलब्धियाँ एवं पद :
• बॉम्बे विधान परिषद् सदस्य : (1926 – 36), बॉम्बे विधान सभा सदस्य : (1937 – 42), श्रम मंत्री, वायसराय, कार्य-परिषद, (1942 – 1946), भारतीय संविधान सभा की मसौदा समिती के अध्यक्ष : (1947 –1950), भारत के प्रथम क़ानून एवं न्यायमंत्री : (1947 – 1951), राज्य सभा सदस्य, बॉम्बे : (1952 – 1956)।
सम्मान :
• बोधिसत्व (1956), भारत रत्न (1990), प्रथम कोलंबियन अ हेड ऑफ द इयर टाईम (2004), द ग्रेटेस्ट इंडियन (2012)
• समाधि स्थल – चैत्य भूमि, मुंबई (महाराष्ट्र)।

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What took place on 13 April 1919 (on the day of crutches)

What took place on 13 April 1919 (on the day of crutches)

What took place on 13 April 1919 (on the day of crutches)

Jallianwala Bagh near the Golden Temple of Amritsar in Punjab Province of India is still considered one of the most cruel and violent massacres in the world.

Reason:

• A peaceful gathering was called for the purpose of protesting the Roulette Act on the day of crutches in Jallianwala Bagh where the elderly, women-children all were involved in thousands.

• Due to heavy protest, the English government had imposed curfew in some opposition provinces, one of which was Punjab. Having such a large number of people in such a way that the province’s immediate lieutenant Garbnar O ‘ Dyer was ordered to Nagwar Gujra and convey a harsh message to all Indians to order his army to execute this massacre.Lt. Proudner O ‘ Dyer:

• Ireland’s landlord background O ‘ Dyer was quite unpopular due to his anti-India and any political dissatisfaction already crushed in the occasion because of his brutal recruitment in his administration before 1919.

जलियाँवाला बाग : 13 अप्रैल
भारत के पंजाब प्रान्त में स्थित अमृतसर के स्वर्ण मन्दिर के निकट जलियाँवाला बाग में 13 अप्रैल 1919 (बैसाखी के दिन) जो हुआ था वह आज भी दुनिया के सबसे क्रूर व हिंसक नरसंहारों में से एक माना जाता हैं।
कारण :
• जलियाँवाला बाग में बैसाखी के दिन रौलेट एक्ट का विरोध करने के उद्देश्य से एक शांतिपूर्ण सभा बुलाई गई थी जहाँ बूढ़े-जवान, औरतें-बच्चे सभी हज़ारों की तादाद में शामिल थे।
• भारी विरोध के चलते अंग्रेजी सरकार ने कुछ विरोधी प्रान्तों में कर्फ्यू लगा रखा था जिनमें से एक पंजाब भी था। ऐसे में इतनी भारी संख्या में लोगों का एक जगह होना प्रान्त के तात्कालिक लेफ्टिनेंट गर्वनर ओ’डायर को नागवार गुजरा और सभी भारतवासियों को एक कठोर सन्देश देने के लिए उसने अपनी सेना को इस नरसंहार को अंजाम देने का आदेश दिया।
लेफ्टिनेंट गर्वनर ओ’डायर :
• आयरलैंड की जमींदार पृष्ठभूमि वाले ओ’डायर अपनी भारत विरोधी तथा किसी भी राजनीतिक असंतोष को पहले ही अवसर में कुचल देने वाली सोच के अलावा उनके प्रशासन में वर्ष 1919 से पहले हुई निर्मम भर्ती की वजह से काफी अलोकप्रिय थे।
बिना चेतावनी के फ़ायरिंग :
• गर्वनर ओ’डायर के आदेश की पालना करते हुए ब्रिगेडियर जनरल रेजिनॉल्ड डायर के नेतृत्व में “गुरखाज़ राइट, 59 लेफ़्ट के 25 गोरखा और 25 बलूच हथियारबंद सैनिकों ने सभा में उपस्थित भीड़ को बिना कोई मौका दिए फायरिंग शुरू कर दी।
• इस हत्याकांड में हताहतों की संख्या स्पष्ट रूप से सामने नहीं है। अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में जहाँ 484 शहीदों की सूची है तो जलियांवाला बाग में कुल 388 शहीदों की। ब्रिटिश राज के अभिलेख में 200 लोगों के घायल व 379 लोगों के शहीद होने का जिक्र है तो वहीँ अनाधिकारिक आँकड़ों के अनुसार शहीदों की संख्या 1000 से अधिक और घायलों की 2000 से भी ज्यादा हैं।
परिणाम :
• तात्कालिक ब्रिटिश प्रशासन के कुछ दयालु व भारत हितेषी अफसरों की नज़रों से लेकर वर्तमान ब्रिटेन में भी इस दिन को ब्रिटिश साम्राज्य का एक काला अध्याय माना जाता है।
• सत्य यह भी है कि इस हिंसक घटना ने कहीं न कहीं भारत में ब्रिटिश साम्राज्य के राज की उल्टी गिनती शुरू कर दी थी।

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Micro sensor based world's first explosive trace detector launched

Micro sensor based world’s first explosive trace detector launched

Microsensor based world’s first explosive trace detector launched• Recently, Union Education Minister Ramesh Pokhriyal Nishank has launched the world’s first micro sensor based indigenous explosive trace detector (ETD) called Sniffer.• This device is % Made in India. It has been developed by IIT Bombay-associated startup Nanosniff Technologies and its marketing has been done by the byproduct of Startup Critical Solutions linked to IIT Delhi east. With this, its basic technology has been patented in the US and Europe.• This (Micro sensor) will help not only strengthen police, security forces and military security but also civil aviation a new security shield. With the help of this product, even smallest parts of the explosive can be detected and appropriate action can be taken. With this, this affordable device will reduce our dependence on imported explosive trace detector devices.

माइक्रोसेंसर आधारित दुनिया का पहला एक्सप्लोसिव ट्रेस डिटेक्टर लॉन्च
• हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने नैनोस्निफर नामक दुनिया के पहले माइक्रोसेंसर आधारित स्वदेशी एक्सप्लोसिव ट्रेस डिटेक्टर (ईटीडी) लॉन्च किया है।
• यह उपकरण सौ प्रतिशत मेड इन इंडिया है। इसे आइआइटी बांबे से जुड़े स्टार्टअप नैनोस्निफ टेक्नोलाजीस ने विकसित किया है और इसकी मार्केटिंग आइआइटी दिल्ली से पूर्व में जुड़े रहे स्टार्टअप क्रिटिकल साल्यूशंस के बाईप्रोडक्ट विहंत टेक्नोलाजीस ने की है। इसके साथ ही इसकी बुनियादी तकनीक का अमेरिका और यूरोप में पेटेंट कराया गया है।
• इसकी मदद से न केवल पुलिस, सुरक्षा बल और सैन्य सुरक्षा को मजबूती मिलेगी बल्कि नागरिक उड्डयन को भी एक नया सुरक्षा कवच मिलेगा। इस उत्पाद की मदद से विस्फोटक के छोटे-छोटे अंश को भी ढूंढा जा सकता है और उचित कार्रवाई की जा सकती है। इसके साथ ही यह किफायती उपकरण आयातित विस्फोटक ट्रेस डिटेक्टर उपकरणों पर हमारी निर्भरता को कम करेगा।

नैनोस्निफर
• नैनोस्निफर पहला माइक्रोसेंसर आधारित विस्फोटक ट्रेस डिटेक्टर है, जो 10 सेकेंड से भी कम समय में विस्फोटक सामग्री का पता लगा सकता है। यह अलग-अलग तरह के विस्फोटक को पहचानता है और उन्हें उसी अनुरूप वर्गीकृत भी करता है।
• यह सैन्य, पारंपरिक और घर के बने विस्फोटकों का पता आसानी से लगा लेता है। नैनोस्निफर आवाज और दृश्य दोनों रूप से अलर्ट करता है।
• ध्यातव्य है कि नैनोस्निफर ने पुणे स्थित DRDO की उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला (HEMRL) परीक्षण को सफलतापूर्वक पार कर दिया है और देश की उच्च आतंकवाद रोधी बल राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) द्वारा भी इसका परीक्षण भी किया गया है।

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Narendra Modi saluted Guru Harichand Thakur of Matua Sect

Narendra Modi saluted Guru Harichand Thakur of Matua Sect

Prime Minister Narendra Modi paid tribute on the birth anniversary of Guru Harichand Thakur of Matua sect• Prime Minister Narendra Modi saluted Guru Harichand Thakur of Matua sect on 09 April on his birth anniversary and said that his life and ideals strengthen many people. With this, the Prime Minister also shared the speech given during the recent visit to Orakandi Thakur BariMatua community• People of Matua sect are seen linked to lower notch in the alphabet system of Hindus. Matua is a special sect of traditional Hindu community, which considers Harichand Thakur as its god.

  1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मतुआ संप्रदाय के गुरु हरिचंद ठाकुर की जयंती पर दी श्रद्धांजलि
    • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 09 अप्रैल को मतुआ संप्रदाय के गुरु हरिचंद ठाकुर की जयंती पर उन्हें नमन किया और कहा कि उनका जीवन और आदर्श अनेक लोगों को ताकत देता है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने हाल में ओराकांडी ठाकुर बाड़ी के भ्रमण के दौरान दिए गए भाषण को भी साझा किया

मतुआ समुदाय
• मतुआ संप्रदाय के लोगों को हिंदुओं की वर्ण व्यवस्था में निचले पायदान से जोड़कर देखा जाता है। मतुआ पारंपरिक हिंदू समुदाय का एक विशेष संप्रदाय हैं, जो हरिचंद ठाकुर को अपना देवता मानता है।
• माना जाता है कि हरिचंद ठाकुर ने मतुआ समुदाय की नींव रखी थी। उनका जन्म लगभग 210 साल (1812 में) पहले गोपालगंज (अब बांग्लादेश) के ओराकांडी में हुआ था। मतुआ सिद्धांत बाद में उनके बेटे गुरुचंद ठाकुर के माध्यम से फैल गया।
• ओराकांडी में हरिचंद ठाकुर और गुरुचंद ठाकुर के निवास और आसपास के क्षेत्र को मतुआ लोग पवित्र स्थान मानते हैं। मतुआ लोगों का का मुख्य मंदिर भी यहीं पर स्थित है।
• हालांकि मतुआ आंदोलन मुख्य रूप से ओराकांडी के आस-पास ही केंद्रित था लेकिन 1947 में भारत की आज़ादी और 1971 में बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के बाद अलग-अलग समय में बड़ी संख्या में मतुआ लोग भारत आ गए थे।
• इस समाज में ऐसे शरणार्थियों की भी बड़ी संख्या है, जिन्हें आजतक भारतीय नागरिकता नहीं मिल पाई है। ऐसे मतुआ शरणार्थी नॉर्थ 24 परगना, साउथ 24 परगना, नदिया, जलपाईगुड़ी, सिलीगुड़ी, कूच बेहार और बर्दवान में फैले हुए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को मतुआ समुदाय के गुरु हरिचंद ठाकुर की जयंती पर उन्हें नमन किया और कहा कि उनका जीवन और आदर्श अनेक लोगों को ताकत देता है. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि श्री श्री हरिचंद ठाकुर की जयंती पर मैं उन्हें नमन करता हूं. उनका जीवन और आदर्श अनेक लोगों को ताकत देता है. उन्होंने शिक्षा और सामाजिक सशक्तीकरण को बहुत महत्व दिया. उनके मूल्य विनम्र और दयालु मतुआ संप्रदाय के लोगों में प्रदर्शित होते हैं.

हरिचंद ठाकुर के बारे में माना जाता है कि उन्होंने ही मतुआ समुदाय की नींव रखी थी. उनका जन्म बांग्लादेश के गोपालगंज स्थित ओरकांडी में हुआ था. मतुआ लोग पारंपरिक हिंदू समुदाय के एक विशेष संप्रदाय हैं, जो हरिचंद ठाकुर को अपना देवता मानते हैं. हाल ही अपने बांग्लादेश दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ओरकांडी गए थे और वहां उन्होंने मतुआ समुदाय के लोगों को संबोधित किया था.

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Netra Kumanan Qualify for Olympics

Netra Kumanan Qualify for Olympics

Netra Kumanan becomes India’s first female sailor to qualify for Olympics. Netra Kumanan became the first ever Indian woman sailor to qualify for the Tokyo Olympics in the laser radial event at the Mussanah Open Championship, which is an Asian Olympic qualifying event. She achieved this by topping the laser radial competition of the Asian qualifiers in Oman.

Kumanan will be the 10th Indian to qualify for a sailing event in the Olympics, but all the earlier nine had been male athletes. All the earlier nine had made it to the Olympics by getting nominated for quota places that were not filled up through the qualifiers. Kumanan is the first Indian to have booked a direct quota place by topping a qualifier.

• Netra Kumanan becomes the first Indian woman sailor to qualify for the Olympics. He made this achievement by being top ranked in the Musana Open Championship Laser Radial Competition in Oman.• The final race is 20 points that are to happen. Netra has already secured his top spot among Asian players one round already. There is a 21-point difference between his nearest Asian rival Ramya Saravanan. He is also an Indian.

नेत्रा कुमानन ओलिंपिक क्वॉलिफाइ करने वाली भारत की पहली महिला नौकाचालक बनीं
• नेत्रा कुमानन ओलिंपिक के लिए क्वॉलिफाइ करने वाली पहली भारतीय महिला नौकाचालक बन गईं हैं। उन्होंने ओमान में मुसाना ओपन चैंपियनशिप की लेजर रेडियल स्पर्धा में शीर्ष स्थान पर रहकर यह उपलब्धि अपने नाम की।
• अंतिम रेस 20 अंक की है जो होना बाकि है नेत्रा ने एक दौर पहले ही एशियाई खिलाड़ियों में अपना शीर्ष स्थान पक्का कर लिया है। उनकी निकटतम एशियाई प्रतिद्वंद्वी रम्या सरवनन के बीच 21 अंकों का अंतर है। वह भी भारतीय ही है।
• नेत्रा इस तरह ओलिंपिक में नौकायन स्पर्धा के लिए क्वॉलिफाइ करने वाली 10वीं भारतीय होंगी, लेकिन उनसे पहले सभी नौ नौकाचालक पुरुष थे। नछातर सिंह जोहाल (2008), श्राफ और सुमित पटेल (2004), एफ तारापोर और साइरस कामा (1992), केली राव (1988), ध्रुव भंडारी (1984), सोली कांट्रेक्टर और एए बासित (1972) इससे पहले नौकायन में ओलिंपिक के लिए क्वॉलिफाइ करने वाले भारतीय हैं।
• नेत्रा अभी तक एकमात्र भारतीय हैं जिन्होंने क्वॉलिफायर में शीर्ष पर रहकर सीधे कोटा हासिल किया है जबकि इससे पहले नौ ओलिंपिक नौकाचालकों ने कोटा तब हासिल किया जब स्थान भर नहीं पाए थे।
• ज्ञात हो कि लेजर रेडियल ‘सिंगलहेंडेड बोट’ होती है जिसमें चालक अकेला नाव चलाता है।

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World Health Day

World Health Day is being celebrated today

World Health Day is being celebrated today• World Health Day (World Health Day) is celebrated every year on 7 April i.e. today all over the world. The main purpose of this day is to make people aware of health issues.• Every year World Health Day has different themes. The theme of World Health Day for 2020 this year is ‘Building a fair, healthier world’.• WHO i.e. the foundation day of the World Health Organization is celebrated every year as World Health Day. WHO’s first World Health Assembly was held in 1950, which was decided to celebrate this day every year.

आज मनाया जा रहा है विश्व स्वास्थ्य दिवस

• हर साल 7 अप्रैल यानी आज के दिन पूरी दुनिया में विश्व स्वास्थ्य दिवस (वर्ल्ड हेल्थ डे) मनाया जाता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूक करना है।
• हर साल विश्व स्वास्थ्य दिवस की अलग-अलग थीम होती है। इस साल यानी 2020 के लिए विश्व स्वास्थ्य दिवस की थीम इस साल वर्ल्ड हेल्थ डे की थीम है ‘एक निष्पक्ष, स्वस्थ दुनिया का निर्माण (‘Building a fairer, healthier world)’ है।
• डब्ल्यूएचओ यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्थापना दिवस को हर साल विश्व स्वास्थ्य दिवस के तौर पर मनाया जाता है। साल 1950 में डब्ल्यूएचओ की पहली विश्व स्वास्थ्य सभा हुई, जिसमें हर वर्ष यह दिवस मनाने का निर्णय लिया गया था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन

• विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना 7 अप्रैल 1948 को की गयी थी। डब्ल्यूएचओ की स्थापना के समय इसके संविधान पर विश्व के 61 देशों ने हस्ताक्षर किए थे और इसकी पहली बैठक 24 जुलाई 1948 को हुई थी। यह संयुक्त राष्ट्र संघ की एक अनुषांगिक इकाई है।
• डब्ल्यूएचओ का मुख्यालय स्विटजरलैंड के जेनेवा शहर में स्थित है। इसका उद्देश्य संसार के लोगो के स्वास्थ्य का स्तर ऊँचा करना है।
• यह विश्व के देशों के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर आपसी सहयोग एवं मानक विकसित करने की संस्था है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के 194 सदस्य देश हैं। भारत भी विश्व स्वास्थ्य संगठन का एक सदस्य देश है और इसका भारतीय मुख्यालय भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित है।
• इथियोपिया के डॉक्टर टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसुस विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के वर्तमान महानिदेशक हैं।

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DRDO lightweight bulletproof jacket made by soldiers

• Defence Research & Development Organization (DRDO) has prepared bulletproof jackets weighing only 9 kg under the Self-reliant Bharat Abhiyan. These medium sized bulletproof jackets are about 1.4 kg lighter than them.• Bulletproof jacket usually weighs up to 17 kg. Medium size bulletproof jackets are 10.4 kg. The jacket that DRDO made weighs only 9 kg, which means it is 1400 grams lighter than the common medium bulletproof jacket. This will benefit Indian soldiers a lot.• This light weight bulletproof jacket has been designed at DRDO’s DMSRDE (Defense Materials & Stores Research & Development Establishment) lab located in Kanpur. The test of this jacket has been successful in TBRL (Terminal Ballistics Research Lab, Chandigarh) and it is completely true to BIS Standard.

DRDO ने जवानों के बनाए हल्के बुलेटप्रूफ जैकेट
• रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत महज 9 किलोग्राम वजन के बुलेटप्रूफ जैकेट तैयार किए हैं। यह मीडियम साइज के बुलेटप्रूफ जैकेटों के मुकाबले करीब 1.4 किलोग्राम हल्के हैं।
• आम तौर पर बुलेटप्रूफ जैकेट का वजन 17 किलोग्राम तक होता है। मीडियम साइज के बुलेटप्रूफ जैकेट 10.4 किलोग्राम के होते हैं। डीआरडीओ ने जिस जैकेट को बनाया है उसका वजन सिर्फ 9 किलोग्राम है यानी यह आम मीडियम बुलेटप्रूफ जैकेट की तुलना में 1400 ग्राम हल्का है। इससे भारतीय सैनिकों को बहुत फायदा मिलेगा।
• इस लाइट वेट बुलेटप्रूफ जैकेट को डीआरडीओ की कानपुर स्थित DMSRDE (डिफेंस मैटेरियल्स ऐंड स्टोर्स रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट इस्टेब्लिशमेंट) लैब में तैयार किया गया है। इस जैकेट का TBRL (टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लैब, चंडीगढ़) में टेस्ट सफल रहा है और यह BIS स्टैंडर्ड पर पूरी तरह खरा उतरा है।

कम वजन की बुलेटप्रूफ जैकेट बढ़ाती है दक्षता
• दरअसल किसी बुलेटप्रूफ जैकेट का थोड़ा सा भी वजन कम होना बहुत बड़ी बात होती है। हल्के वजन के जैकेटों की मांग सबसे ज्यादा होती है। कम वजनी बुलेटप्रूफ जैकेट से सैनिक की क्षमता भी बढ़ती है। जैकेट का वजन जितना ज्यादा होगा, सैनिक के लिए उसे पहनकर काम करना उतना ही चुनौती वाला होगा।
• सैनिक जिन हथियारों से लैस होते हैं उनका वजन और साथ में पहने गए बुलेटप्रूफ जैकेट का वजन बोझ बढ़ाते हैं। ऐसे में अगर जैकेट कम वजन के होंगे तो यह सैनिकों के लिए सुविधाजनक होंगे। जैकेट जितने कम वजन के होते हैं, उन्हें उतनी ही उच्च क्वॉलिटी का माना जाता है।

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Target of four percent inflation till March 2026

• The Central Government has not made any changes to the current target of controlling inflation for the Reserve Bank of India within a four percent radius.• RBI has been given the responsibility of keeping inflation (inflation) within an average scope of 4 percent for the next five years. This would be easily acceptable to a maximum of 2 percent decrease. Even under the current system, the RBI has been targeted to keep retail inflation at 4 percent with a decrease or increase of 2 percent.• It is said that the government had decided to form a monetary policy committee chaired by the RBI governor in 2016 to keep inflation at a prescribed level. The committee was given the responsibility to fix the policy rate (repo).• The six-member monetary policy committee was given the responsibility of keeping annual inflation at 4 percent in October 2016 until March 31, 2021 It kept the highest limit 6 percent and the minimum limit 2 percent.

In Hindi :

चार प्रतिशत मु्द्रास्फीति का लक्ष्य मार्च 2026 तक बनाए रखने का फैसला
• केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक के लिए मुद्रास्फीति को चार प्रतिशत के दायरे में काबू में रखने के वर्तमान लक्ष्य में कोई बदलाव नहीं किया है।
• आरबीआई को अगले पांच साल तक मुद्रास्फीति (Inflation) को औसतन 4 प्रतिशत के दायरे में रखने की जिम्मेदारी दी गई है। इसमें सहज रूप से ज्यादा से ज्यादा 2 प्रतिशत की घट-बढ़ स्वीकार्य होगी। मौजूदा व्यवस्था के तहत भी आरबीआई को 2 प्रतिशत की कमी या वृद्धि के साथ खुदरा मुद्रास्फीति 4 प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य दिया गया है।
• विदित है कि सरकार ने मुद्रास्फीति को निर्धारित स्तर पर रखने के लिये 2016 में आरबीआई गवर्नर की अध्यक्षता में मौद्रिक नीति समिति गठित करने का निर्णय किया था। समिति को नीतिगत दर (रेपो) तय करने की जिम्मेदारी दी गयी थी।
• छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति को अक्टूबर 2016 में सालाना मुद्रास्फीति 31 मार्च, 2021 तक 4 प्रतिशत पर रखने की जिम्मेदारी दी गयी थी। इसमें उच्चतम सीमा 6 प्रतिशत और न्यूनतम सीमा 2 प्रतिशत रखी गयी थी।

मौद्रिक नीति समिति
• मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) भारत सरकार द्वारा गठित एक समिति है जिसका गठन वाणिज्यिक बैंकों के लिए ब्याज दर निर्धारण, अर्थव्यवस्था में समावेशी विकास तथा सरकार द्वारा निर्धारित उद्देश्यों को प्राप्त करने हेतु 27 जून, 2016 को किया गया था।
• भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम-1934 में संशोधन करते हुए भारत में नीति निर्माण का कार्य नवगठित मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) को सौंप दिया गया है।
• नई एमपीसी में छह सदस्यों का एक पैनल है जिसमें तीन सदस्य आरबीआई से होंगे और तीन अन्य स्वतंत्र सदस्य भारत सरकार द्वारा चुने जाते हैं। आरबीआई के तीन अधिकारीयों में एक गवर्नर, एक डिप्टी गवर्नर तथा कार्यकारी निदेशक शामिल होता है।
• मौद्रिक नीति सर्वसम्मति से निर्णय लेती है। यदि बराबर मत है तो गवर्नर को निर्णायक मत देने का अधिकार होता है।

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